हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

फलस्तीन के बारे में एक छोटी सी भूमिका

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/03/2007 03:07:00 AM


रेयाज़-उल-हक
इसे नक्शे पर खोजने का मतलब है
खोजना खून और मांस के लोथड़े
जो सड़कों पर जम गये हैं
और बदबू दे रहे हैं.

शब्दकोशों में यह शब्द
एक अपमान की तरह आता है
दस्तावेज़ इसे दरसाते हैं
एक वेदना के रूप में
इतिहास निरंतर सिमटती जाती
किन्हीं लकीरों के बारे में बताता है.

मत खोजो
मत खोजो फलस्तीन को
बाहर
यह मौज़ूद है
फलस्तीनियों के दिमाग में
वहां पल रह है
यह एक स्वप्न की तरह
अंतहीन संघर्ष
और विजय के संकल्प के साथ
आज़ादी के लिए.

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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